बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में बाढ़ का असर अब होटल और होम स्टे कारोबार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। घाटों के डूबने के कारण पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है और वीकेंड पर भी घाट किनारे के कई होटल खाली नजर आ रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक, पिछले करीब 15 दिनों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
वाराणसी में घाटों और गलियों के आसपास करीब 8 हजार से ज्यादा होम स्टे बताए जाते हैं। लेकिन बाढ़ के हालात बिगड़ने के बाद इनकी बुकिंग आधे से भी कम रह गई है। शनिवार और रविवार को कुछ पर्यटक पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी संख्या भी काफी कम है। जो लोग वाराणसी आ रहे हैं, वे भी ज्यादा दिन रुकने के बजाय एक दिन में ही लौट रहे हैं। इसकी बड़ी वजह शहर के सभी 84 घाटों का पानी में डूबा होना है।
भेलूपुर इलाके के होम स्टे संचालक अविनाश कुमार ने बताया कि अगस्त के तीसरे सप्ताह तक कारोबार सामान्य चल रहा था। इसके बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने और घाटों के डूबने से पर्यटकों की आवाजाही तेजी से कम हो गई। कारोबारी विवेक कुमार ने बताया कि पहले जो कमरा करीब 2 हजार रुपये में बुक हो जाता था, उसके लिए अब 1 हजार रुपये मिलना भी मुश्किल है। कारोबारियों को उम्मीद है कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद पर्यटकों की संख्या फिर बढ़ेगी।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, वाराणसी में गंगा का जलस्तर अब भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। बाढ़ के कारण वरुणा किनारे के करीब एक दर्जन मोहल्ले जलमग्न हैं और लगभग 300 परिवार राहत शिविरों में जा चुके हैं। कई गांव भी बाढ़ की चपेट में हैं। कारोबारियों के अनुसार, होटल और होम स्टे सेक्टर को रोजाना 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है, यानी सिर्फ 10 दिनों में नुकसान 5 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। वहीं, 84 घाट पिछले करीब 10 दिनों से पानी में डूबे हैं और अंतिम संस्कार तक छतों पर किए जा रहे हैं।